Sunday, August 27, 2017

मिट्टी की हांडी में खाना पकाना प्रेशर कुकर से बेहतर, जानें कैसे





आज के समय में आप जो खा रहे हैं वह आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है और ना ही हरी सब्जियों की कोई गारंटी। मतलब साफ है कि साइंस के इस युग में किसी के स्वास्थ का कोई मोल नहीं है। जबकि हम लोग खाना इसलिए खाते हैं ताकी हमारे शरीर को जरूरी पोषक तत्‍व मिल सकें। हालांकि हमारे आहार में मिनरल्‍स, विटामिन्‍स और प्रोटीन मौजूद होते हैं लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि गुणों बढ़ाने या घटाने में पकाने वाले बर्तन का विशेष स्‍थान होता है। शायद आपको यह बात थोड़ी अजीब से लग रही होगी, लेकिन यह सच है।  

प्राचीन काल से ही मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने की प्रथा रही है। आज भले ही साइंस ने कितनी भी तरक्की क्यों न कर ली हो, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए तो आज भी मिट्टी की हांडी में खाना पकाना प्रेशर कुकर की तुलना में कई गुना ज्यादा लाभकारी सिद्ध होता है। मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से हर बीमारी को शरीर से दूर रखा जा सकता है। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान ने भी माना है।  
आयुर्वेद के अुनसार खाना पकाते समय उसे हवा का स्पर्श मिलना बहुत जरूरी होता है। लेकिन प्रेशर कूकर के भाप से भोजन पकता नहीं है बल्कि उबलता है। भोजन धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। इससे भोजन पौष्टिक के साथ स्वादिष्ट भी बनता है। साथ ही भोजन में मौजूद सभी प्रोटीन शरीर को खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं। मिट्टी के बर्तनों में खाना थोड़ा धीमा बनता है पर सेहत को पूरा फायदा मिलता है। और जो खाना जल्दी पकता है वो खतरनाक भी होता है।

इंसान के शरीर को रोज 18 प्रकार के सूक्षम पोषक तत्व मिलने चाहिए। जो केवल मिट्टी से ही आते हैं। कैल्शियम, मैग्‍नीशियम, सल्‍फर, आयरन, सिलिकॉन, कोबाल्ट, जिप्सम आदि। मिट्टी के इन्ही गुणों और पवित्रता के कारण हमारे यहां आज भी कर्इ मंदिरों में मिट्टी के बर्तनों में प्रसाद बनता है। लेकिन प्रेशर कुकर एल्यूमीनियम का होता है जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। जिससे टी.बी, डायबिटीज, अस्थमा और पेरेलिसिस हो सकता है। इसलिए प्रेशर कुकर का ज्यादा इस्तेमाल शरीर के लिए हानिकारक है। आइये जानें मिट्टी के बर्तनों में खाना क्‍यों पकाना चाहिए।

वादिष्‍ट बनता है भोजन

हालांकि मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने में थोड़ा समय ज्‍यादा लगता है लेकिन स्वाद के मामले में मिट्टी के बर्तनों में पके भोजन का कोई जवाब नहीं। प्रेशर कुकर में बनाए भोजन की तुलना में मिट्टी के बर्तनों में पकाया भोजन काफी ज्यादा स्वादिष्ट होता हैं। अगर आपको खाने में सौंधी-सौंधी खुशबू पसंद है, तो मिट्टी के बर्तन में पका हुआ खाना आपको एक अलग स्वाद का अनुभव कराएगा।


माइक्रो न्यूट्रीएंट्स कम नहीं होते 
 

क्‍या आप जानते हैं कि स्‍वादिष्‍ट बनने के साथ मिट्टी के बर्तनों में पकी दाल में माइक्रो न्यूट्रीएंट्स 100 प्रतिशत रहते है जबकि, प्रेशर कुकर में पकाई दाल में 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। पीतल के बर्तन में बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं। कांसे के बर्तन में बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

खाना खराब नहीं होता

मिट्टी के बर्तन में पके भोजन जल्दी खराब नहीं होते। साथ ही मिट्टी के बर्तन में पकाए भोजन आपके पोषक तत्वों को कम नहीं होने देते।


दूध और दूध से बने प्रोडक्‍ट के लिए सबसे उपयुक्त

आपने बंगालियों की सबसे पसंदीदा चीज यानी मिष्टी दोई या दही तो जरूर खाया होगा। अगर आपको भी यह पसंद है तो इसे खाने के लिए आपको बंगाल जाने की जरूरत नहीं है। आप अपने घर पर मिट्टी की हांडी में इसे बना सकते हैं। इसी तरह आप इसमें नॉर्मल दही भी जमा सकते हैं। अगर आप इसमें गर्म दूध डालकर पिएंगे तो आपको दूध बहुत ही स्वादिष्ट लगेगा और आप हमेशा ऐसे ही दूध पीना चाहेंगे क्योंकि मिट्टी की खुशबू दूध के स्वाद को दोगुना कर देगी।

इस तरह मिट्टी की हांडी में खाना पकाना कितना लाभदायक होता है आप जान चुके हैं। इसलिए हम आपसे यही कहेंगे कि जहां तक हो सके कुकर की तुलना में मिट्टी की हांडी में खाना पकाना ज्यादा अच्छा होगा क्योंकि इसमें आपका भोजन स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर रहता है! समय थोड़ा ज्यादा तो जरूर लगेगा, लेकिन इसमें पकाए गए भोजन के स्वाद और गुणवत्ता की पूरी गारंटी है। हालांकि बहुत ही कम लोग इस बात को मानेगें लेकिन ये बात सच है कि अगर आप स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं तो ज्यादा से ज्यादा मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करें। 

Sunday, April 16, 2017

Women's Health Tips for Heart, Mind, and Body

Looking for the path toward a healthier you? It's not hard to find. The journey begins with some simple tweaks to your lifestyle. The right diet, exercise, and stress-relief plan all play a big role.

Follow a Heart-Healthy Diet

There's an easy recipe if your goal is to keep away problems like heart disease and strokes.
  • Eat more fruits and veggies.
  • Choose whole grains. Try brown rice instead of white. Switch to whole wheat pasta.
  • Choose lean proteins like poultry, fish, beans, and legumes.
  • Cut down on processed foods, sugar, salt, and saturated fat.
When eating healthy, flexibility often works best, says Joyce Meng, MD, assistant professor at the Pat and Jim Calhoun Cardiology Center at UConn Health. If you like to follow a strict diet plan, go for it. If not, it's OK. "Find what works for you."
Tricia Montgomery, 52, the founder of K9 Fit Club, knows first-hand how the right diet and lifestyle can help. For her, choosing healthy foods and planning small, frequent meals works well. "I don't deny myself anything," she says. "I still have dessert -- key lime pie, yum! -- and I love frozen gummy bears, but moderation is key."

Exercise Every Day

The more active you are, the better, Meng says. Exercise boosts your heart health, builds muscle and bone strength, and wards off health problems.
Aim for 2 and a half hours of moderate activity, like brisk walking or dancing, every week. If you're OK with vigorous exercise, stick to 1 hour and 15 minutes a week of things like running or playing tennis. Add a couple of days of strength training, too.
If you're busy, try short bursts of activity throughout the day. Walk often. A good target is 10,000 steps a day. Take the stairs. Park your car far away from your destination.
Montgomery exercises every day, often with her dog. By adding lunges, squats, and stairs to a walk, she turns it into a power workout. "I also am a huge Pilates fan," she says.

Lose Weight

When you shed pounds you'll lower your risk of heart disease, type 2 diabetes, and cancer.

Aim for a slow, steady drop. Try to lose 1-2 pounds a week by being active and eating better.
"It doesn't have to be an hour of intense exercise every day," Meng says. "Any little bit helps."
As you improve, dial up the time and how hard you work out. If you want to lose a lot of weight, try for 300 minutes of exercise a week.
"Eating a healthy diet will go a long way," Meng says. Start by cutting sugar, which she says is often hiding in plain sight -- in store-bought items like salad dressing, packaged bread, and nuts. Try to avoid soda and sugar-laced coffee drinks, too.

Visit Your Doctor

Get regular checkups. Your doctor keeps track of your medical history and can help you stay healthy. For example, if you're at risk for osteoporosis, a condition that weakens bones, he may want you to get more calcium and vitamin D.
Your doctor may recommend screening tests to keep an eye on your health and catch conditions early when they're easier to treat.
Keep the lines of communication open. "If you have questions, ask your doctor," Meng says. "Make sure you understand things to your satisfaction." If you're worried about a medication or procedure, talk to him about it.

Cut Down Your stress

It can take a toll on your health. You probably can't avoid it altogether, but you can find ways to ease the impact. Don't take on too much. Try to set limits with yourself and others. It's OK to say no.
To relieve stress, try:
  • Deep breathing
  • Meditation
  • Yoga
  • Massage
  • Exercise
  • Healthy eating
  • Talking to a friend, family member, or professional counselor

Create Healthy Habits

If you make the right choices today, you can ward off problems tomorrow.
  • Brush your teeth twice a day and floss every day.
  • Don't smoke.
  • Limit your alcohol. Keep it to one drink a day.
  • If you have medication, take it exactly how your doctor prescribed it.
  • Improve your sleep. Aim for 8 hours. If you have trouble getting shut-eye, talk to your doctor.
  • Use sunscreen and stay out of the sun from 10 a.m. to 3 p.m.
  • Wear your seatbelt.
Take time every day to invest in your health, Meng says.
It paid off for Montgomery. She says she overcame health problems, feels good, and has a positive outlook. "My life," she says, "is forever changed."

Friday, March 31, 2017

डिप्रेशन से बचना है तो हफ्ते में दो बार करें योग






स्टन : एक सप्ताह में दो बार योग एवं गहरी सांस लेने की कक्षाओं में शामिल होने और घर पर इसका अभ्यास करने से अवसाद के लक्षणों में कमी आ सकती है। एक नए अध्ययन में यह बात कही गई है

यह अध्ययन, अवसाद के औषधीय उपचार के विकल्प के तौर पर योग आधारित कार्यक्रमों के इस्तेमाल का समर्थन करता है। अध्ययन के अनुसार अवसाद से निपटने के लिए योग औषधीय उपचार के विकल्प के तौर पर कारगर है।
अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर, क्रिस स्ट्रीटर के मुताबिक, ‘‘यह अध्ययन योग के प्रयोग का समर्थन करता है और ऐसे अवसादग्रस्त लोगों की श्वसन क्रिया में सहायक होता है, जो अवसाद रोधी दवाओं का प्रयोग नहीं करते है। इसके अलावा योग ऐसे व्यक्तियों के लिए भी कारगर है, जो एक निश्चित मात्रा में अवसाद रोधी दवाओं का सेवन करते हैं, अथवा दवाओं के बाद भी जिनके अवसाद के लक्षणों में सुधार नहीं हो सका है।’’ 
शोधार्थियों का कहना है कि प्रमुख अवसादग्रस्त विकार (एमडीडी) सामान्य है और बार बार होने वाला पुराना और अशक्त बनाने वाला विकार है। अवसाद वैश्विक स्तर पर अन्य बीमारियों की तुलना में कई सालों से विकलांगता के लिए जिम्मेदार है। इसमें कहा गया है कि करीब 40 प्रतिशत लोग लंबे समय तक अवसाद रोधी दवाओं का सेवन करने के बावजूद भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सके हैं।
यह शोध वैकल्पिक एवं पूरक चिकित्सा संबंधी एक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें आसन एवं श्वसन नियंत्रण की सटीक विधियों के लिए आयंगर योग के विस्तार पर जोर दिया गया है।

ब्लूबेरी का जूस पीने से बढ़ती है दिमागी ताकतः शोध










लंदनः क्या आपको पता है कि रोजाना ब्लूबेरी का 30 एमएल जूस पीने से के दिमागी ताकत में इजाफा हो सकता है. खास तौर से बड़ी उम्र के लोगों के लिए यह लाभकारी है. एक हालिया रिसर्च में ये बात सामने आई है कि रोजाना ब्लूबेरी का जूस पीने वाले 65 से 77 साल उम्र के बीच के स्वस्थ लोगों में संज्ञानात्मक कार्य, दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन और दिमागी सक्रियता में सुधार नजर आया। यह जानकारी संज्ञानात्मक परीक्षण यानि Cognitive test के दौरान सामने आयी। 

ब्रिटेन में एक्सीटर विश्वविद्यालय के जोआना बोट्टेल के मुताबिक, ‘‘जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है हमारी संज्ञानात्मक क्रिया में गिरावट आती है, लेकिन पूर्ववर्ती शोधों से पता चला है कि पेड़-पौधों से जुड़े खाद्य पदाथरें के सेवन से बुजुर्गों की संज्ञानात्मक क्रिया बेहतर होती है.’’ बोट्टेल ने बताया, ‘‘इस अध्ययन में हमने पाया कि 12 सप्ताह तक हर दिन 30 मिलीमीटर ब्लूबेरी का जूस पीने पर इस उम्र समूह के स्वस्थ बुजुर्गों के मस्तिष्क में खून का प्रवाह, दिमाग की सक्रियता और कामकाजी स्मृति में बढ़ोतरी होती है.’’
अध्ययन में 26 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया जिसमें से 12 को ब्लूबेरी का जूस दिया गया जबकि 14 को प्रायोगिक औषधि दी गयी. शोधकर्ताओं ने बताया कि इससे कामकाजी याद्दाश्त में भी सुधार के प्रमाण मिले हैं. ब्लूबेरी में फ्लेवोनोइड पाया जाता है जो एंटी ऑक्सीडेंट होता है और जलन तथा सूजन को कम करने वाले गुणों से भरपूर रहता है.

अंगूर खाने के हैं कई फायदे















नई दिल्ली : इन दिनों अंगूर का मौसम है. बाज़ार में आसानी से काफी सस्ते दामों में अंगूर मिल जाते हैं. अंगूर एक रसीला फल है जो ज़्यादातर लोगों को पसंद होता है. अंगूर की सबसे अच्छी बात ये है कि दूसरे फलों की तरह इसे काटने और छीलने का झंझट नहीं होगा. आमतौर पर दो तरह के अंगूर भारत में मिलते हैं, काले और हरे अंगूर. अंगूर भले ही किसी भी रंग का खाएं, ये आपकी सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. 

गूर प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, सोडियम, फाइबर, विटामिन ए, सी, ई व के, कैल्शियम, कॉपर, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है. अंगूर खाने से पेट की बीमारियों में राहत मिलती है. अंगूर खाने से कब्ज को दूर किया जा सकता है. वहीं उल्टी आने पर अंगूर पर नमक,काली मिर्च लगाकर खाने से उल्टी आना बंद हो जाती है.
माइग्रेस की समस्या को करता है दूर
अगर आपको माइग्रेन की समस्या है तो आपको अंगूर खाने चाहिए. इससे अंगूर सिरदर्द दर्द से राहत पाई जा सकती है. हो सके तो दर्द होने पर अंगूर का रस पियें, जल्दी फायदा होगा. अंगूर शरीर में खून की कमी को पूरा करता है. इसका कारण है कि इसमें काफी मात्रा में आयरन पाया जाता है. अगर आपको खून की कमी या एनीमिया है तो आपको नियमित रूप से अंगूर खाना चाहिए या अंगूर का रस पीना चाहिए. खून की कमी को दूर करने के लिए एक गिलास अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलकार पीने से खून की कमी दूर हो जाती है.
स्किन पर नैचुरल ग्लो आता है
अंगूर खाने से स्किन पर नैचुरल ग्लो आता है. इससे चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों, झुर्रियों से छुटकारा पाया जा सकता है. सुबह-शाम अंगूर खाइए अर्थराइटिस या जोड़ो के दर्द में आराम मिलेगा क्योंकि अंगूर शरीर से उन लवणों को निकाल देता है, जिनके कारण अर्थराइटिस शरीर में बनी रहती है. यदि आप भूख न लगने की समस्या से परेशान हैं और इस वजह से ही आपका वजन भी नहीं बढ़ रहा तो आप ज्यादा से ज्यादा अंगूर खाएं. इसके सेवन से कब्ज की समस्या तो दूर होती ही है, साथ ही भूख भी लगने लग जाती है. अंगूर का रस निकालकर उस रस से गरारे करने से मुंह में होने वाले छालों से राहत पाई जा सकती है.
 
एजेंसी 

Zee जानकारी: सेहत के लिए जरूरी है दोपहर की नींद

 



नींद की कमी से संघर्ष कर रही है. कुदरत की तरफ से दी गई ये सहूलियत अब Luxury बनती जा रही है. यानी अगर आप 8 से 9 घंटे की नींद ले रहे हैं तो आप दुनिया के सबसे खुशकिस्मत लोगों में से एक हैं. लेकिन हमें यकीन है कि आपमें से बहुत से लोग ऐसे होंगे जिन्हें पूरी नींद नहीं मिल पा रही होगी. नींद की कमी से संघर्ष कर रहे लोगों को हमारा आज का ये DNA टेस्ट जरूर देखना चाहिए. क्योंकि ये आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत से जुड़ा विषय है. और हमें आपकी सेहत की फिक्र है. इस विश्लेषण के लिए हमने दुनिया के कई बड़े Institutes के रिसर्च Papers पढ़े हैं.


आप में से बहुत सारे लोगों ने दोपहर की नींद या झपकी के बारे में ज़रूर सुना होगा, और आपको दोपहर का खाना खाने के बाद नींद ज़रूर आती होगी, लेकिन ज्यादातर लोग दोपहर में सो नहीं पाते हैं, क्योंकि तेज़ी से भागती जिंदगी में दोपहर तो क्या रात में भी ठीक से सोने का वक्त नहीं मिलता है. लेकिन आपको शायद ये नहीं पता होगा कि दोपहर के समय ली जाने वाली नींद आपको कई तरह के रोगों से बचा सकती है. और दोपहर में सोने वाले लोगों का दिमाग भी दूसरे लोगों के मुकाबले ज्यादा तेज़ चलने लगता है.
अमेरिका के Harvard School of Public Health के मुताबिक जो लोग दोपहर में कुछ देर के लिए सो पाते हैं. उनमें Heart Attack की आशंका 33 प्रतिशत तक कम हो जाती है. कामकाजी लोगों को तो इससे और भी ज्यादा फायदा होता है. नौकरी या व्यापार करने वाले लोग अगर दोपहर में एक झपकी ले लें तो उनमें Heart Attack की आशंका 64 प्रतिशत तक कम हो सकती है. ज़रूरी नहीं है कि आप हर रोज़ दोपहर में सोएं. जो लोग हफ्ते में 3 बार भी. दोपहर में 30 मिनट तक सो पाते हैं. उन्हें दिल की बीमारियां होने की आशंका 37 प्रतिशत तक कम हो जाती है.
कुछ दिनों पहले चीन में भी दोपहर की नींद पर एक प्रयोग किया गया था. इस प्रयोग में 65 वर्ष से ऊपर के 3 हज़ार बुजुर्गों को शामिल किया गया. प्रयोग के दौरान पता चला कि जिन बुजुर्गों ने दोपहर में कम से कम 1 घंटे की नींद ली थी उन्होंने दूसरे बुजुर्गों के मुकाबले गणित के सवाल ज्यादा आसानी से हल कर लिए थे. यानी दोपहर की नींद आपको Reboot और Refresh कर देती है। और आपका दिमाग कम्पयूटर की तरह चलने लगता है. 
 
दोपहर की नींद को अंग्रेज़ी में Afternoon Nap या Siesta भी कहते हैं। Siesta एक स्पेनिश शब्द है. जिसका अर्थ होता है दोपहर के वक्त ली जाने वाली छोटी अवधि की नींद. ये नींद अक्सर दोपहर का खाना खाने के बाद ली जाती है. गर्म देशों में तो Siesta यानी दोपहर की नींद परंपरा का हिस्सा हैं. लेकिन 24 घंटे और सातों दिन काम काम में जुटे रहने वाली जीवनशैली ने दोपहर की नींद की अहमियत बहुत कम कर दी है.
 
भारतीय संस्कृति में भी दोपहर की नींद का काफी महत्व रहा है, योग और आयुर्वेद की परंपरा में खाना खाने के बाद ली जाने वाली छोटी अवधि की नींद को वामकुक्षी कहा जाता है। वामकुक्षी के दौरान सिर को बाएं हाथ पर रखकर थोड़ी देर के लिए लेटा जाता है. भगवान विष्णु भी शेषनाग पर वामकुक्षी अवस्था में ही लेटते हैं। इस अवस्था में लेटने से सूर्य-नाड़ी सक्रिय हो जाती हैं, जिससे खाना पचाने में मदद मिलती है.
काम के दौरान नींद की झपकी लेना. जापान की परंपरा का भी हिस्सा है. वहां इसे Inemuri के नाम से जाना जाता है. जापान में अगर कोई कर्मचारी काम करते करते सो जाता है. तो उसे सम्मान की नज़र से देखा जाता है. क्योंकि जापान में लोग ऐसा मानते हैं कि काम के दौरान उसी की नींद आती है. जो कठिन परिश्रम करता है.
जापान में लोग Public Transport से सफर करते हुए, लेक्चर लेते हुए, Class Rooms या फिर दूसरी सार्वजनिक जगहों पर भी अचानक सो जाते हैं. कई लोग तो खड़े खड़े भी झपकी लेने लगते हैं. लेकिन वहां किसी को ये अजीब नहीं लगता. क्योंकि वहां इसे कठिन परिश्रम की पहचान माना जाता है. इटली में भी Siesta की संस्कृति काफी पुरानी है. इटली में आज भी ज्यादातर जगहों पर दोपहर के वक्त, चर्च, म्यूज़ियम और दुकानें बंद कर दी जाती हैं. दुकानों के मालिक घर चले जाते हैं. जहां वो खाना खाकर कुछ देर के लिए सो जाते हैं.
इसी हफ़्ते ब्रिटेन में University of Leeds के वैज्ञानिकों ने कंपनियों के Bosses से अपील की है कि वो अपने कर्मचारियों को दोपहर में कुछ देर के लिए सोने दें. ब्रिटेन में 25 प्रतिशत लोग ऐसे हैं. जो 24 घंटों में 5 घंटे से भी कम देर के लिए सो पाते हैं. वैज्ञानिकों को डर है कि आने वाले वक्त में. ब्रिटेन के लोगों की नींद 4 घंटे के आस-पास रह जाएगी. ऐसे में सिर्फ दोपहर की नींद ही इस कमी को पूरा कर सकती है.
भारत में पश्चिम बंगाल औऱ गोवा जैसे राज्यों में दोपहर की नींद आज भी संस्कृति का हिस्सा है. लेकिन धीरे-धीरे भारतीयों की नींद भी कम होती जा रही है. वर्ष 2015 में  भारतीय लोगों की सोने की आदतों पर, एक कंपनी ने सर्वे किया था. इस सर्वे में पता चला कि भारत के 93 प्रतिशत लोग ठीक से नहीं सो पाते हैं. ये वो लोग हैं जो कम नींद लेने की वजह से कई तरह की परेशानियां झेल रहे हैं. सर्वे में शामिल 72 प्रतिशत भारतीय लोगों ने माना कि वो रात में 3 से 4 बार नींद से उठते हैं. जबकि 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कम नींद की वजह से उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है. 57 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नींद की कमी की वजह से दफ्तर में उनका काम प्रभावित होता है.
ब्रिटेन के मशहूर लेखक Thomas Dekker ने कहा था कि नींद ऐसी सुनहरी रस्सी है जो स्वास्थ्य और शरीर को आपस में बांधे रखती है. Thomas Dekker ने ये बात आज से करीब 300 वर्ष पहले कही थी. जबकि मशहूर वैज्ञानिक Thomas Alva Edison ने कहा था  कि नींद लेना वक्त को बर्बाद करने जैसा है और ये एक अपराध है. नींद की आदत को हमने गुफाओं में सोने वाले अपने पूर्वजों से हासिल किया है.
दो अलग अलग समय पर. दो महान लोगों द्वारा नींद के संबंध में कही गई दो अलग अलग बातें. ये साबित करने के लिए काफी हैं. कि वक्त के साथ इंसान ने अच्छी नींद को कम अहमियत देना शुरू कर दिया है. जिसका असर हमारी सेहत और हमारे दिमाग पर पड़ रहा है. ये ऐसा दौर है जब भारत सहित पूरी दुनिया के लोगों को नींद का महत्व पहचानना होगा. इसीलिए हमने नींद को नज़रअंदाज़ करने वालों के लिए एक DNA टेस्ट तैयार किया है. अगर आपको भी दोपहर का खाना खाने के बाद थोड़ी देर सुस्ताने या सोने का मन करता है. तो आपको हमारा ये विश्लेषण ज़रूर देखना चाहिए और अगर आप किसी कंपनी या Organization के Boss हैं. तो आपको ये विश्लेषण देखकर सोचना चाहिए. कि क्या आप अपने कर्मचारियों को दोपहर में थोड़ी देर के लिए सोने की इजाज़त दे सकते हैं. 
Fitness Gadgets बनाने वाली एक विदेशी कंपनी के मुताबिक भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है. जहां के लोग सबसे कम देर सोते हैं. जनवरी 2016 से दिसंबर 2017 के दौरान जमा किए गए Data के मुताबिक दुनिया में सबसे कम नींद जापान के लोग लेते हैं. एक जापानी  औसतन 6 घंटा 35 मिनट सोचा है. इसके बाद भारतीयों का नंबर आता है. जिनकी औसत नींद 6 घंटा 55 मिनट की है। 6 घंटा 56 मिनट की औसत नींद के साथ सिंगापुर और ताइवान तीसरे और चौथे नंबर पर हैं. 18 देशों  की इस Ranking में सबसे ज्यादा देर तक सोने वाला देश न्यूजीलैंड है. जहां लोग औसतन 7 घंटा 25 मिनट की नींद लेते हैं. इसके बाद  ब्रिटेन का नंबर आता है. जहां लोग औसतन 7 घंटा और 16 मिनट सोते हैं.
1950 में पूरी दुनिया के लोग औसतन 8 घंटे की नींद लिया करते थे. जबकि 2013 आते आते लोगों की नींद सिर्फ 6 घंटे 30 मिनट ही रह गई. हर रोज़ 8 घंटे की नींद को आधार बनाया जाए तो 90 वर्ष तक जीने वाला एक व्यक्ति अपने जीवन के 32 वर्ष सोते हुए बिताता है. कई लोगों को ये वक्त की बर्बादी लगता है. लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि नींद अच्छी सेहत के लिए कुदरत की तरफ से दिया गया सबसे बड़ा वरदान है. वैज्ञानिकों के मुताबिक पहले इंसान के पूर्वज पेड़ों पर रहते थे और तब नीचे गिरने के डर की वजह से उनकी नींद कच्ची हुआ करती थी. लेकिन आज से करीब 20 लाख वर्ष पहले इंसानों ने ज़मीन पर रहना शुरू कर दिया और तभी से बिस्तर पर सोने की भी शुरूआत हुई. गिरने का डर खत्म होने की वजह से इंसानों की नींद लंबी हो गई. और इंसानों को गहरी नींद भी आने लगी. इसका मतलब ये है कि ये सब क्रमिक विकास यानी Evolution के तहत हुआ है. लेकिन यहां हम आपको नींद से जुड़ी एक वैधानिक चेतावनी भी देना चाहते हैं. दोपहर में नींद लेने का हक उन्हीं लोगों को होना चाहिए. जो कड़ी मेहनत करते हैं. ये छूट उन लोगों की नहीं दी जा सकती. जो कामचोरी करते हैं और अपना काम ईमानदारी से नहीं करते हैं.

पोषण-तत्वों से भरपूर होता है कुट्टू का आटा

ई दिल्‍ली : कुट्टू का आटा अनाज नहीं, बल्कि फल से बनता है और अनाज का बेहतर विकल्प होने के साथ पौष्टिक तत्वों भरपूर भी होता है. आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल की मानें तो कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है और जिन्हें गेहूं से एलर्जी हो, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है. इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फासफोरस भरपूर मात्रा में होता है. इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट रूटीन भी होता है जो कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को कम करता है. 

कुट्टू के आटे में मिलावट से रहें सावधान
चूंकि कुट्टू के आटे को चबाना आसान नहीं होता, इसलिए इसे कम से कम 6 घंटे पहले भिगो कर रखा जाता है, फिर इन्हें नर्म बनाने के लिए पकाया जाता है, ताकि आसानी से पच सके. चूंकि इसमें ग्लूटन नहीं होता है इसलिए इसे बांधने के लिए आलू का प्रयोग किया जाता है. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसकी पूरियां बनाने के लिए हाईड्रोजेनरेट तेल या वनस्पति का प्रयोग न करें, क्‍योंकि यह इसके पोषक तत्वों को खत्म कर देता है. कुट्टू के आटे में मिलावट की जा सकती है और इसे विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदना चाहिए. पिछले साल का बचा हुआ आटा भी प्रयोग नहीं करना चाहिए, इससे फूड-प्वॉयजनिंग हो सकती है.
डायबिटीज, पथरी से बचाता है कुट्टू का आटा
कुट्टू 75 प्रतिशत जटिल काबोहाइड्रेट है और 25 प्रतिशत हाई क्वालिटी प्रोटीन, वजन कम करने में यह बेहतरीन मदद करता है. इसमें अल्फा लाइनोलेनिक एसिड होता है, जो एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है और एलडीएल को कम करता है. यह अघुलनशील फायबर का अच्छा स्रोत है और गॉलब्लैडर में पत्थरी होने से बचाता है. फाइबर से भरपूर और ग्लिसेमिक इंडेक्स कम होने से यह डायबिटीज वालों के लिए बेहतर विकल्प है. कुट्टू के आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स 47 होता है.